
राकेश आनन्दकर
देश के प्रधानमंत्री का राष्ट्रीय संदेश
हमने घर की गृह मंत्री को सुनाया ।
सोना नहीं खरीदना है एक साल शुद्ध ।
ये सुनते ही घर में शुरू हो गया युद्ध ॥
पत्नी बोली , पहले कहते थे
चांदी जैसा रंग है तेरा सोने जैसे बाल ।
ऐसे सब्जबाग दिखाकर तुमने कहा
घर के साथ – मेरा देश भी संभाल ॥
आम आदमी के भाग्य में सोना नहीं
चांदी और तांबे तक के भाव बड़े हैं ।
पैसे वालों की लड़ाई में हम लाचार
सरेआम महंगाई के हत्ते चढ़े हैं ॥
हमने कहा भाग्यवान सब तेल का खेल है ।
अर्थव्यवस्था को समझों और समझाओं
पत्नी बोली अपने ऐशो आराम कम करो ।
जनहित में मेरा मुंह मत खुलवाओं ॥
कहे ! कविराय सोने की चमक
अन्य धातु से बर्शर्ते तेज है ।
खरीदारी में समझदारी रखना
ये निगोड़ी दुल्हन की सेज है ॥













