
हमेशा कहते हैं लोग”सदा सत्यं” बदामि”सदा सत्य बोलो”
पर कितने लोग सच बोलते हैं..?
सच बोलने से सभी डरते हैं
जब उनका सच सामने आता है
तो लोग नजरें झुका लेते हैं या चुराने लगते हैं
जब कोर्ट में गवाह खड़ा रहता है
और सब कुछ देखता है
फिर भी जज कहता है कि
सबूत लाओ, तब बोलो
सच ,मुझे कागज पर चाहिए
अखबार में छप जाए तो सच
टीवी बोले तो सच, गली मोहल्ले का सच कूड़े के सामान पड़ा रहता है
रिश्वत लेते हुए क्लर्क हंसना है
“देखो काम हो गया है ना”हमने करा दिया
ईमानदार दर-दर भटकता रहता है
क्योंकि उसके पास कागज पर सबूत, सच नहीं था
कलम उठाकर लिख डालो
जो देखा है,जो बीता है, जो सहा है
क्योंकि आज के दौर में जब तक कागज पर स्याही ना बोले, ना लिखें
तब तक सच भी, झूठा है
इसलिए लिखो दीवारों पर लिखो दिलों पर लिखो, लिखो खून से, पर लिखो जरूर
क्योंकि अब ये अंधा कानून है
इसे सच कागज पर चाहिए
डॉ मीना कुमारी परिहार












