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सीड बाल

विधा -कविता
कौशल

मुट्ठी भर मिट्टी में हमने, सपनों को बो डाला,
सूखी धरती के आंगन में, हरियाली का उजियाला।

बीजों संग आशा बांधी, प्रेम मिला हर बार,
सीड बाल बनकर निकला, प्रकृति का उपहार।

नन्हें-नन्हें गोलों में अब, जीवन छिपा हुआ है,
हर कण में भविष्य सुनहरा, जैसे दीप जला है।

जंगल, पर्वत, खेत, किनारे, हर सूनी सी राहें,
इनके गिरते ही मुस्काएँ, बंजर पड़ी निगाहें।

जब बरखा की बूंदें गिरतीं, मिट्टी गंध उड़ाती,
सीड बाल की गोद से फिर, कोपल बाहर आती।

पंछी गाएँ मीठे स्वर में, पेड़ों पर घर पाएँ,
धरती मां की सूनी चुनरी, फिर से हरी हो जाए।

एक छोटा सा यह प्रयास, बड़ा संदेश सुनाता,
पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ, हर मन को समझाता।

नदियां फिर कल-कल बहतीं, शीतल पवन सुहानी,
हरियाली से महके जग में, खुशियों की कहानी।

आओ मिलकर शपथ ये लें, वृक्षों का मान बढ़ाएँ,
सीड बाल के संग धरती पर, नव जीवन बरसाएँ।

मुड़पार चु ,पोस्ट रसौटा,
तहसील पामगढ़ ,
जिला जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़

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