
जाग गए सपने तो अम्बर तक जाने दो ।
सागर की हलचल से ,
लहरों के छलबल से ,
नाविक के साहस को,
हार मत जाने जीदो। ।
दिखती है छौने सी ,
आशा जो कानन में,
सूरज की किरणों से
सुनहरी हो जाने दो ।
पंख नएआये हैं ,
हौसले परखने को
मुक्त करो मन को
और ऊँचा उड़ जाने दो।
रात के अंधियार से है ,
युद्ध एक प्रकाश का,
हर लेगा तम सारा ,
दीप एक जलाने दो,,,,
उन अंधेरी बस्तियों में ,
जल रही मशाल है
कौन लेकर दौड़ता है
बस यही सवाल है
रौशनी को कैद करो
जुगनुओं की शक्ल में
अग्नि की प्रतीक्षा है
रात ढल जाने दो
रश्मियों को ढक लिया
क्यो बादलों नें ओट से
हथेलियों पर आज नए सूर्य उग जाने दो
सूर्य उग जाने दो
पूर्णिमा भसीन
लखनऊ













