
अमिय-विष का संतुलन रखें बनाकर
जमाने मे सबो पर ना चले भरोसा कर
हाथी के दाँत से लोग है,यहाँ बैठे दर दर
दिखते जैसे है,होते नही वैसे,इससे इनकार ना कर
अमिय पान का लोभ दिखा,विषपान है कराते
चिकनी चुपड़ी बातों से,सदैव मन है मोह लेते
काम पूरी होते ही,फुर्र से हो ,है जाते
अमय थे या विष वो,हम तो है,सोचते रहते
कहते है चुन्नू कवि बात ये,सबो को समझाकर
बेमतलब का कोई बैठे तेरे पास ,आकर
फायदा तुझे हो कि बाते करे,जोड़ तोड़ कर
सचेत हो जाओ तु,ये बाते मान कर
कि,ये अमिय नही विष का प्याला आये है लेकर
ये जगत ऐसा है ना कि बेमतलब का है ना कोई
फिर ये बंदा मेरे फायदे का,बाते कैसे है,ले आई?
जरूर दाल मे कुछ काला है,ये दिमाग मे लाये
अमिय विष का भाव सोचते ,उसे दूर भगाये
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड













