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बाल स्वर-सरिता से गुंजायमान हुई २५१वीं कल्पकथा साप्ताहिक काव्यगोष्ठी

नन्हे सृजनकारों की काव्य प्रतिभा और वरिष्ठ साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति से सजा भावपूर्ण साहित्यिक उत्सव

प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार के तत्वावधान में आयोजित २५१वीं साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी – बाल सृजनकार विशेष अत्यंत हर्ष, उल्लास और साहित्यिक गरिमा के मध्य संपन्न हुई। इस विशेष आयोजन में बाल प्रतिभाओं की मधुर अभिव्यक्तियों ने पूरे वातावरण को बाल-सुलभ सौंदर्य, संवेदना और रचनात्मकता से आलोकित कर दिया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े बाल एवं वरिष्ठ साहित्यकारों ने अपनी काव्य प्रस्तुति से श्रोताओं का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा प्रस्तुत संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना एवं माँ सरस्वती वंदना से हुआ। वंदना की सुरमयी प्रस्तुति ने सम्पूर्ण आयोजन को आध्यात्मिक एवं साहित्यिक ऊँचाई प्रदान की।
इस विशेष गोष्ठी की अध्यक्षता मेधावी बाल प्रतिभा एवं एम डी एस विद्यालय उदयपुर की कक्षा नौ की छात्रा कु. पाखी जैन ने गरिमापूर्वक की, जबकि मुख्य अतिथि का दायित्व पी एम श्री विद्यालय ईटावा में कक्षा सात की विद्यार्थी कु. अनन्या शर्मा द्वारा निभाया गया। कार्यक्रम का अत्यंत प्रभावशाली, ऊर्जस्वी एवं सुरुचिपूर्ण संचालन ओज कवि भास्कर सिंह माणिक ने किया। उनके कुशल संचालन ने कार्यक्रम को सुंदर प्रवाह और आत्मीयता प्रदान की।

प्रथम चरण में बाल साहित्यकारों ने अपनी अनुपम रचनाओं का पाठ किया। इनमें — अद्विका द्विवेदी, आरुष शर्मा, मन्नत ग्रोवर, आयषी चौधरी, गौरवी जैन, कार्वी श्रीवास्तव, आदित्य मंजवानी, अम्बरीश मिश्र, मिहु अग्रवाल, अविनाश सेमवाल, अनुष्का सेमवाल, पाखी जैन, अनन्या शर्मा ने अपनी बाल-सुलभ कल्पनाशीलता, भावप्रवणता और सहज अभिव्यक्ति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

द्वितीय चरण में वरिष्ठ साहित्यकारों की गरिमामयी प्रस्तुतियों ने आयोजन को विशिष्ट ऊँचाई प्रदान की। इसमें पण्डित अवधेश प्रसाद मिश्र ‘मधुप’, मंगल जैन, विजय रघुनाथराव डांगे, डॉ. अंजू सेमवाल, श्रीमती शोभा प्रसाद, बिनोद कुमार पाण्डेय, भगवानदास शर्मा ‘प्रशांत’, दीदी राधा श्री शर्मा, भास्कर सिंह माणिक, पवनेश मिश्र ने काव्य पाठ कर सभा को भाव-विभोर कर दिया।

दर्शक दीर्घा में कीर्ति त्यागी, जितेंद्र शास्त्री, मेघा अग्रवाल, बीना पाण्डेय, भारती आहूजा, निशि मंजवानी, पवन चौधरी, रविकांत पाण्डेय सहित अनेक साहित्यप्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी श्रोताओं ने प्रस्तुतियों का हृदय से स्वागत किया तथा बाल सृजनकारों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् के १५०वें स्मरणोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में सामूहिक राष्ट्रगीत गायन हुआ, जिससे वातावरण राष्ट्रप्रेम और सांस्कृतिक चेतना से अनुप्राणित हो उठा। समापन अवसर पर दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा जी ने सभी आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों, बाल प्रतिभाओं एवं उपस्थित दर्शकों के प्रति हार्दिक आभार ज्ञापित किया। तत्पश्चात “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के मंगलमय शांति पाठ के साथ कार्यक्रम को विश्राम दिया गया।

संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार यह आयोजन बाल प्रतिभाओं के प्रोत्साहन, साहित्यिक संस्कारों के संवर्धन और हिंदी साहित्य के उज्ज्वल भविष्य के प्रति संस्था की सतत प्रतिबद्धता का प्रेरक उदाहरण रहा। कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार ने इस आयोजन के माध्यम से पुनः सिद्ध किया कि बाल मन की कोमल अभिव्यक्तियाँ ही भविष्य के साहित्यिक आकाश के उज्ज्वल नक्षत्र हैं।

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