
आओ पलायन रोके हम बिहार का,
बिहार में उत्थान हो अब रोजगार का,
कब तक हम दिल्ली मुम्बई जातें रहेंगे,
अपने घर परिवार से हम दूर होते रहेंगें,
वर्षो वर्ष बित जातें हैं बाहर में साहेब,
छठ न होली मना पाते हैं बाहर में साहेब,
जिंदगी यूं हीं कब तक चलेगा साहेब,
कभी न कभी कहीं न कहीं रूकेगा साहेब,
क्योंकि हम गरीबों का यही हाल है,
कभी दिल्ली तो कभी मुम्बई जाना है,
जिंदगी कट जाती है राश्ते में,
और अपने लूट लेतें हैं सस्ते में,
सिकायत करें तो हम किस करें,
अपने ही अपनों को चुप करा देतें हैं,
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,













