
बदलता मौसम कुछ कहता है,
हर पल नया संदेश देता है।
कभी धूप सुनहरी मुस्काती है,
कभी बदली मन को बहलाती है।
कभी धूप की चादर ओढ़े,
कभी बादल बन छा जाता है।
यह बदलता मौसम हर पल,
जीवन का पाठ पढ़ाता है।
जेठ की गर्म हवाओं में,
धरती तपकर मुस्काती है।
सावन के पहली बूंदों से,
सुखी बगिया खिल जाती है।
पतझड़ जब पत्ते बिखराए,
मन में थोड़ी उदासी लाए।
फिर बसंत के कोमल स्पर्श से,
हर डाली पर फूल मुस्काए।
नदियों की जल गुनगुन करता,
पवन मधुर संगीत सुनाती।
प्रकृति अपने रंग बदलकर,
नई कहानी रोज सुनाती।
कभी पवन शीतल गीत सुनाए,
कभी तपता सूरज आग बरसाए।
कभी रिमझिम वर्षा की फुहार,
धरती का करती श्रृंगार।
अनिता महेश पाणिग्राही छत्तीसगढ़













