
ब्रह्मा के श्रीमुख से प्रकट हुई, ज्ञान-ज्योति अविराम,
वेदों की वाणी गूँज उठी, बढ़ा धर्म का नाम।
संस्कारों की अमृत धारा, बहती रहे सदैव,
सेवा, त्याग और सदाचार, यही हमारा देव।।
ज्ञान हमारा संस्कार है, सेवा हमारा धर्म,
मानवता के कल्याण हेतु, करते रहें सत्कर्म।
विश्व ब्राह्मण दिवस मनाएँ, मिलकर आज महान,
ब्राह्मण संस्कृति के गौरव को, शत-शत करें प्रणाम।।
ज्ञान हमारा संस्कार है, सेवा हमारा धर्म,
मानवता के कल्याण हेतु, करते रहें सत्कर्म।
विश्व ब्राह्मण दिवस मनाएँ, मिलकर आज महान,
ब्राह्मण संस्कृति के गौरव को, शत-शत करें प्रणाम।।
भगवान परशुराम की कृपा, सब पर बनी रहे,
सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य, शांति, हर जीवन में बहे।
वेदों की इस दिव्य परंपरा का, बढ़ता रहे सम्मान,
विश्व ब्राह्मण दिवस मनाएं,मिलकर आज महान।
ब्राह्मण संस्कृति के गौरव को, शत-शत करें प्रणाम।।
प्रतिभा दिनेश कर
विकासखण्ड सरायपाली













