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तक़दीर के रिश्ते

कुछ भी इत्तेफ़ाक़ नहीं इस जहाँ में,
हर मिलन का कोई कारण होता है।
जो लोग हमारी राहों में आते हैं,
उनका नाम कहीं तक़दीर में लिखा होता है।।

कभी कोई मुस्कान बनकर मिलता है,
कभी दर्द की सीख सिखा जाता है।
कोई पल भर का साथ निभाकर भी,
उम्र भर दिल में घर बना जाता है।।

कुछ रिश्ते शब्दों से नहीं बंधते,
बस एहसासों में पलते रहते हैं।
दूर होकर भी जो पास लगें,
वो दिल के सबसे अपने होते हैं।।

हाथों का ये स्पर्श कहता है,
साथ केवल शरीरों का नहीं होता।
रूह से रूह जब जुड़ जाती है,
तब कोई रिश्ता अधूरा नहीं होता।।

शायद इसी का नाम मुकद्दर है,
जो बिना माँगे हमें मिल जाता है।
और जो सच में हमारा होता है,
वो लाख दूर होकर भी लौट आता है।।

इसलिए हर मिलने वाले को,
दिल से सम्मान दिया करो।
क्या पता किस रूप में ईश्वर ने,
तुम्हारी ज़िंदगी में उसे भेजा हो।।

कुछ भी इत्तेफ़ाक़ नहीं होता,
हर कहानी का एक सिरा होता है।
जिससे भी आपका मिलना होता है,
वो कहीं न कहीं आपकी तक़दीर में लिखा होता है।।

नेहा कुमारी(खुशी)
जम्मू

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