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तेरी बेवफ़ाई

तेरी बेवफ़ाई की न उम्मीद थी,
गलती थी तेरी, मुझे इल्ज़ाम दी।

उस शाम जो तूने तोहफ़ा दिया,
वो मर्ज़ी थी तेरी या थी बेबसी।

तेरे बाद दिल को सुकूँ न मिला,
बहुत ढूँढ़ ली हमने हर इक खुशी।

नज़र से गिराकर भुला तो दिया,
मगर दिल से कैसे भुला पाओगी

तोड़ दिए सारे वो अरमाँ मेरे
संग तेरे जो देखे थे सपने हंसीं

कभी साथ चलने की कसमें खाई
मगर बीच राहों में क्यों छोड़ दी

जो सपने सजाए थे संग तुम मेरे,
उन्हें किस तरह से तुम मिटा पाओगी

रवि भूषण वर्मा

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