
एक बात बोलूं साहेब,भले आज हम बाल श्रम के खिलाफ है।
लेकिन आज के बच्चे समय से पहले कुछ कर दिखाने का हूनर रखता है।
मालूम है क्या कोई खेल कूद में माहिर है तो पढने लिखने में माहिर है।
सरकारी नौकरी पाने में माहिर है तो कोई अपना भविष्य बनाने में माहिर है।
लेकिन हर लड़ाका कुछ न कुछ कर दिखाने में आज कल माहिर है।
क्योंकि आज कल हर कोई चाहता है इनटरनेट से ज्यादा फास्ट चलूं।
और समय से आने से पहले समय को समय से ही मांग लूं।
क्योंकि हर लड़का हर लड़की इस तरह का करतब दिखाने का हूनर रखतें हैं।
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,











