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संस्कार और आत्मा का सफर

आत्मा अजर-अमर ‌‌
पुनर्जन्म में भी गुण-सूत्र न जाएं बिखर
कैसे भी परिवार में हो पुनर्जन्म अच्छे-बुरे गुण-सूत्र
मानव जीवन में अपने अस्तित्व दे खबर
बहुत निम्न सोच की आत्मा
पुनर्जन्म में उच्च कुल में जन्में… भी आए नजर
श्रेष्ठ जन की आत्मा
चाहे दरिद्र कुल में जन्म पा ले अगर
अपने पूर्व ज्ञान की छाया में
नये जीवन में
अपने गुण-सूत्र का न करे त्याग
मृत्यु का आत्मा संग गुण-अवगुण पर नहीं असर ।

ये सब कर्मानुसार मिलें गे फल
गीता भी दे ये ही संदेश
चाहे कैसा भी कर्मानुसार मिले परिवेश
पूर्व गुणों के बल
ढूंढ ले वो फिर से खोए संस्कार
मृत्यु करे केवल काया नाश
आत्मा अजर-अमर… चाहे जन्मे बारंबार
अपनी प्रवृत्ति के जीव में पाए
फिर खोया आधार ।

काया निरंतर उपजाए ….दे गुण नव पीढ़ी
विज्ञान कहे ये गुण-सूत्र —
स्त्री-पुरुष मिलन से पीढ़ी दर पीढ़ी
अच्छे गुणों के संग
बुरे गुण भी चले निरंतर
आनुवंशिक (जैनेटिक) रोगों का भी रहे असर ।

वातावरण से भी सीखे जीव गुण-अवगुण
यदि प्रबल हैं पूर्वजन्म…. या पीढी के गुण
वातावरण भी बदल न पाए
बिगड़ न पाएं…. चाहे कितने कठिन आएं क्षण ।

आत्मा अजर-अमर है
संग गुण अवगुण दिखाएं प्रभाव असर
कोई पाश्चात्य ज्ञान-विज्ञान
अंतर्ज्ञान को न समझ पाया
लटका वो अभी अधर ।
– महेश शर्मा, करनाल

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