
धीरे-धीरे इंसान यहां पर अब,
विनाश की ओर चला जा रहा है|
नदिया सीमट सी गई है यहाँ,
और जंगल अब काटा जा रहा है|
धीरे-धीरे इंसान यहां पर अब …..
मानवता मानव मे खत्म हो चली है,
अब स्वार्थ में इंसान जिए जा रहा है|
धीरे-धीरे इंसान यहां पर अब,
विनाश की ओर चले जा रहा है|
धीरे-धीरे इंसान यहां पर देखो…..
पर्यावरण दूषित हो रहा है आज,
और हवा में जहर घुला जा रहा है |
रिश्ते नाते सब दिखावे के है देखो ,
अब इंसान स्वार्थ में जिए जा रहा है|
धीरे-धीरे इंसान यहां पर अब,
विनाश की और चले जा रहा है|
परमाणु बम बढ़ाने की होड लगी है,
क्यों मौत का समान बनाया जा रहा है|
धीरे-धीरे इंसान यहां पर अब देखो,
विनाश की ओर निरंतर चले जा रहा है |
कवि राजेंद्र कुमार वर्मा
कोटा राजस्थान










