
वो घर की धूप है और आँगन की छाँव है ।
वो माँ की दुआ है और पिता का मान है ।
वो भाई की शक्ति है और बहन की जान है ।
वो पाठशाला की शान है और देश का मान है ।
वो पुस्तकों से नाता भी निभाती है ।
वो रसोई में माँ का हाथ बँटाती है ।
वो खेल के मैदान में नाम कमाती है ।
वो मंच पर खड़े होकर बाजी मारती है ।
वो डॉक्टर बनकर मरहम लगाती है ।
वो वर्दी पहनकर सीमा संभालती है ।
वो लैब में बैठकर खोज रचाती है ।
वो भाषण देकर सोच बदल जाती है ।
बेटी बोझ नहीं घर की बरकत है ।
बेटी दो घरों की इज्जत है ।
जिस घर में बेटी मुस्काती है ‘ अमन ‘ ।
वहाँ लक्ष्मी खुद आकर बसती है ।
इसलिए दुनिया बेटी को पढ़ाओ ।
इसलिए दुनिया बेटी को बढ़ाओ ।
क्योंकि बेटी ही घर का उजाला है ।
जिससे जीवन का अंधेरा मिटता है ।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला अमन सनातनी
सावनेर नागपुर महाराष्ट्र
जय बेटी । जय नारी शक्ति ।












