
त्यौहार की देन है खुशिया, इसे जरूर मनाए
जब भी आये त्यौहार का वक्त,सब इक्ट्ठा हो जाये
शिकवा गिला जो भी रहे मन मे,किसी के प्रति
त्यौहार के वक्त भूलाकर वो सब,खुशी है लुटाती ।
जीवन जीने के भागमभाग मे,रहते है सब निराश
रोजमर्रा की जीवन मे संघर्ष। से,सब रहते है उदास
थोडी सी भी खुशी मिल जाये,इसके रहते है प्रयास
ऐसे ही वक्त मे त्यौहार से,मन मे आता है हर्षोल्लास।
कोई भी त्यौहार, किसी भी धर्म का,होता है
उसका प्रभाव समाज के हरेक समूदाय मे होता है
एक दुसरे को शुभकामना, बधाई संदेश देते है
उसके खुशी मे ही ,खुद की खुश ढूंढ लेते है
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड












