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बेटा – पिता का वजूद

वो पिता के कंधे का मजबूत सहारा है ,
वो माता की आँखों का उजला सितारा है ।
वो बहना की राखी का पक्का पहरेदार है ,
वो अपने घर की चौखट का निगहबान है ।

वो बाप के पसीने का मोल समझता है ,
वो माँ के आँचल की छाँव समझता है ।
वो बहना के आँसू पर लड़ने जाता है ,
वो घर की इज्जत पर मरने जाता है ।

वो बचपन में नंगे पाँव दौड़ता है ,
वो किताबों से अपना कल गढ़ता है ।
वो ठोकर खाकर फिर खड़ा होता है ,
वो खुद जलकर घर रोशन करता है ।

वो खेतों में हल चलाना जानता है ,
वो दफ्तर में बोझ उठाना जानता है ।
वो सरहद पर बंदूक उठाना जानता है ,
वो लैब में देश का मान बढ़ाना जानता है ।

वो माँ के लिए दवाई लाना जानता है ,
वो पिता के लिए लाठी बनना जानता है ।
वो बहना के लिए छाँव बनना जानता है ,
वो दोस्त के लिए जान लुटाना जानता है ।

जब पिता थकता है तो बेटा चलता है,
जब माँ रोती है तो बेटा संभलता है ।
जब घर टूटता है तो बेटा जोड़ता है,
जब वक्त रूठता है तो बेटा लड़ता है ।

बेटा कभी बोझ नहीं घर की नींव है,
बेटा पिता के सर का ऊँचा ताज है ।
जिस घर में बेटा संस्कारी है ‘ अमन ‘ ,
उस घर में पिता का कद ऊँचा है ।

इसलिए बेटे को शिक्षा और संस्कार दो ,
इसलिए बेटे को हिम्मत और हुनर दो ।
क्योंकि बेटा ही वंश का दीपक है ,
जिससे कुल का अंधेरा मिटता है ।

अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला अमन सनातनी
सावनेर नागपुर महाराष्ट्र

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