
सजी कुमकुम अक्षत से थाल है राखी,
सदा प्रेम से हरी वो डाल है राखी,
रंगी विश्वास के पावन रंग से,
गुंथी निष्ठा के कच्चे धागे से।
बहन की ढाल भाई की शान है राखी,
भाई के माथे का पावन भाल है राखी,
ये धागा नहीं वादा है इरादा है,
बहन की दुआ का पावन वादा है।
बहन सजाए आरती का थाल सारा,
भाई का मुखड़ा खुशी से दमके सारा,
तिलक माथे पर बंधन कलाई पर,
प्यार बहे जैसे सावन की धार पर।
भाई कहे सुन बहना प्यारी मेरी,
हर संकट से रक्षा करूंगा तेरी,
तू न कभी उदास होगी बहना,
तेरी हँसी ही रहेगी अब गहना।
बचपन की यादें फिर से जागी हैं,
साथ बिताई वो बातें याद आती हैं,
लड़ना-झगड़ना और फिर मन जाना,
तेरा वो रूठना और मेरा मनाना।
दूर सही पर दिल पास हमारे,
यादों में बसे हैं एहसास हमारे,
एक धागे में सिमटा संसार सारा,
भाई-बहन का प्यार सबसे प्यारा।
ये बंधन कभी टूटेगा नहीं,
ये रिश्ता कभी छूटेगा नहीं,
सदा बना रहे ये प्यार हमारा,
यही है रक्षा बंधन का नारा।
सावन में आया ये त्यौहार प्यारा,
लाया है खुशियों की बहार प्यारा,
बहन का प्यार भाई का दुलार,
राखी का यही है सच्चा सार।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला अमन सनातनी
सावनेर, नागपुर, महाराष्ट्र













