
“आया आया रे,
पावन ,
राखी का त्योहार।
आया आया रे पावन
,राखी का त्योहार।
देखो देखो है,
हरियाला सावन,
खिले खिले हैं ,
सबके मन
फैली चारों
ओर बहार।
आया आया रे ,……
रक्षाबंधन,
पावन त्योहार है।
भैया-भावज का
मिल रहा
दुलार है।
कितना प्यारा लगे
मायके का मनुहार।
आया आया रे……
जीवन भर मेरे भैया ,
निभाना।
राखी का बंधन
नहीं ये
स्नेह है
सुहाना।
याद फिर से आये रे
मुझे
बचपन का
वो संसार।
आया आया रे
,पावन राखी का त्योहार
आया आया रे
,पावन राखी का त्योहार।”
डॉ नवनीता दुबे “नूपुर”
मण्डला ,मप्र













