
ईश्वर के मिलन से,बड़ा कोई लाभ नहीं।
यह सच बात जोभी, नर जान जाता है।।
ईश्वर की सेवा में वो, रहता है रात दिन।
उसको तो कोई दुःख, नहीं भटकाता है।।
दुख के संयोग से तो, जो भी नर छूट गया।
सुख से वो भर कर, योग में समाता है।।
योग से ना उकताएं, चिंतन ना भटकाएं।
पूरी दृढ़ता के साथ योग किया जाता है।।
महेंद्र कुमार मधुकर












