
मैं मना लूंगा तुम रूठ के देखो,
मैं जोड़ लूंगा तुम टूट के देखो।
मैं थोड़ा पागल हूँ पर झूठा नहीं हूँ,
तुम छोड़ भी दो तो मैं टूटा नहीं हूँ।
तुम रूठो तो घर में मन नहीं लगता,
तुम हँसो तो सब कुछ अच्छा लगता।
तुम पास रहो तो दिन बन जाता है,
तुम दूर जाओ तो दिल घबराता है।
तुम सुबह हो तुम ही शाम हो मेरी,
तुम ही मेरे हर एक काम हो मेरी।
तुम गुस्सा करो तो प्यार बढ़ता है,
तुम चुप रहो तो इंतजार बढ़ता है।
मैंने तुमको दिल से अपना माना है,
तुमको ही अपना सपना माना है।
तुम हाथ छुड़ाओ मैं हाथ थाम लूंगा,
तुम दूर जाओ मैं पास आ जाऊंगा।
ये कागज की लिखी बात नहीं है,
ये मेरे दिल की सच्ची बात है।
तुम ही मेरी पहली चाहत हो,
तुम ही मेरी आखिरी चाहत हो।
अंतर्राष्ट्रीय
हास्य कवि व्यंग्यकार
अमन रंगेला अमन सनातनी सावनेर नागपुर महाराष्ट्र










