
स्तुति काव्य
पधारो हमरे अंगना माई
दिन की वो शुभ घड़ी आई
पावन तुमरे चरण पखारे माई
चरण धो लाल महावर लगाई
हलवा पूरी का भोग लागे
कन्या पूजन से खुशियां आवे माई
गरबा करत बालक बालिका तुमरी भक्ति सुहाई
नव रूपों मे माँ तुम हमरे घर आंगन मे आई
गलती कौनू होई जाये तो क्षमा हमका चाही
हमरी अभिलाषा को पूर्ण करो माई
जगत जननी जगदात्री जगत की हो माई
तुमरे पांव पखारे माई
जीवन हमारा सफल होई जाई
कृपानिधान करूणादायी माँ भवानी मेरी माई
सर्वत्र हीं माँ सदा सुहाई
जगदंबा रूप काली रूप देख मन अत्यंत ही हर्षाइ
पावन तेरा रूप माँ आशीष तेरा मन भावे सुखदायी
जो जने पायें तुम्हारे तर जायें माँ सातों जनम का त्रास
एईसन माँ का आशीष एईसन माँ का वास
सुखदायिनी अमृतदायिनी ममतामयी माँ शारदा माई
जनम जनम के पाप कटे जो भजे तुमरा ही नाम सदैव माई।
बोलो सांचे दरबार की जय
बोलो शारदा माई की जय
बोलो जोगनी माई की जय
बोलो दुर्गा भवानी की जय
बोलो काली माई की जय
स्वरचित स्तुति माँ भवानी के श्री चरणों मे
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र












