कल्पकथा निरंतर हिन्दी साहित्य और सनातन संस्कृति की उन्नति के लिए आगे बढ़ रही है – रघुवंशमणि सिंह

कल्पकथा सम्मान समारोह अक्टूबर २०२६ में ज्योति प्यासी को कल्प शिल्प विभूषण एवं रमापति मौर्य को कल्प सृजन कौशल सम्राट सम्मान
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी ज्योति सिंह ने बताया कि अक्टूबर २०२६ मासिक सम्मान समारोह में कल्पकथा परिवार ने विविध विधाओं में विद्वान रचनाकारों को सम्मानित किया।
डॉ. गजेंद्र हरिहारनों दीप की अध्यक्षता और वरिष्ठ पत्रकार, समाजसेवी प्रधान संपादक एवं संचालक राष्ट्रीय दैनिक न्यूज धमाका श्री रघुवंशमणि सिंह जी जमशेदपुर झारखंड के मुख्य आतिथ्य में कार्यक्रम का कल्पकथा साहित्य संस्था के यूट्यूब चैनल पर सीधा प्रसारण किया गया जिसमें देश भर के साहित्य प्रेमीजनों की गरिमामय उपस्थिति रही।
पवनेश मिश्र के संचालन के आयोजन में सूर्यपाल नामदेव चँचल को कल्प सृजन भूषण, अवधेश प्रसाद मिश्र मधुप को कल्प कवि कुल कलश, मीरा परिहार मंजरी को कल्प वैचारिक शिखर, विजय रघुनाथराव डांगे को कल्प स्वर साधक सम्मान से सम्मानित किया गया। वही मंच संचालन एवं संयोजन हेतु भास्कर सिंह माणिक को काव्यगोष्ठी, कीर्ति त्यागी को कल्प भेंटवार्ता, अतुल कुमार खरे को कल्प कथा मंजूषा विशेष कल्प संवाद कौशल अलंकरण से अलंकृत किया गया जबकि ज्योति प्यासी को कल्प शिल्प विभूषण सम्मान प्रदान किया गया।
कल्पकथा परिवार द्वारा विशेष रूप से सृजन और नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए संचालित शब्द आधारित सृजन कार्यक्रम दैनिक कल्प सर्जना में पटल प्रभारी विशेष कल्प सर्जना ध्वजवाहक सम्मान से डॉ जया शर्मा प्रियंवदा, ज्योति प्यासी, प्रेमलता कुमारी पुष्पेश, सूर्यपाल नामदेव चँचल, अमित पण्डा अमिट रोशनाई, अर्चित सावर्णी का अभिनंदन किया गया जबकि रमापति मौर्य को कल्प सृजन कौशल सम्राट, डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र आदित्य को कल्प सृजन कौशल मुकुट, एवं सांद्रा लुटावन गणेश को कल्प सृजन कौशल प्रासाद प्रशस्ति पत्र से सत्कारित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय दैनिक न्यूज धमाका के संस्थापक एवं संचालक श्री रघुवंशमणि सिंह ने कहा कि कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार एवं स्वयंसेवी संगठन निरंतर हिन्दी साहित्य और सनातन संस्कृति की उन्नति के आगे बढ़ रही है। दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा की के नेतृत्व में संस्था के प्रयास सराहनीय है। अंत में देश प्रेम की भाव धारा को समर्पित राष्ट्रगीत वन्दे मातरम के १५०वैं स्मरणोत्सव वर्ष में अमर बलिदानियों के सम्मान में वन्देमातरम गायन के पश्चात सभी का आभार व्यक्त किया गया।












