
जप तप त्याग तपस्या की मूरति: द्वितीय नवदुर्गा माँ बृह्मचारिणी
ज़ोर से बोलो जय माता दी,
सारे बोलो जय माता दी,
आगे बोलो जय माता दी,
पीछे बोलो जय माता दी।
अम्बे मैया आई, जगदंबे माँ आई हैं,
घर बाहर सबकी ख़ुशियाँ लाई हैं।
घर मंदिर के आँगन द्वार सजा दो,
सुंदर फूलों से कण कण महकाओ।
दरश तुम्हारे को नैना तरसें माँ,
झर झर आँसू निकल रहे हैं माँ,
भक्ति प्रेमरस में सब डूब रहे माँ,
सब मिलकर चरण पखारूँ हे माँ।
जप तप त्याग तपस्या की मूरति,
द्वितीय दुर्गा हैं ब्रह्मचारिणी माता,
हज़ारों वर्ष तप व्रत शिव का करि,
पति परमेश्वर स्वरूप में पाया था।
एक हाथ माला से सुशोभित माँ,
एक हाथ में कमंडल लिये हुये माँ,
आदित्य तेजस्विनी ब्रह्मचारिणी,
समस्त संसार का कल्याण करें माँ।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्या वाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ












