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माँ शैलपुत्री

प्रथम दिवस

नमो नमः नव दुर्गे, अंबा शक्ति महान।
शैलपुत्री भवानीं, करूँ हृदय से ध्यान।।

हिमवन की तुम सुता, त्रिशूल कर कमल हाथ।
भक्तों के दुख हरन में, दिखलाओ जग पथ।।

कन्या रूप सुहावनी, शांति स्वरूप निशा।
आरोग्य दायिनी भव, मिटाओ भय-त्रसा।।

शुंभ-निशुंभ नाशिनी, कर दो पाप संहार।
स्त्री-शक्ति की मूर्ति हो, रक्षा करो अपार।।

अन्यायों का अंत कर, दो सन्मार्ग प्रकाश।
मानवता उद्धारिणी, बनो जगत की आस।।

नर-पिशाच सब हारें, झूठ अंधेरा खोय।
घोटालों के भूत दल, तेरे चरण संजोय।।

गिरिराज सुता मातु, दो दृढ़ता अपार।
जन-चेतन को जागृत, कर दो जग उद्धार।।

गौ-घृत भोग लगाऊँ, करूँ विजय उपास।
नौ शक्तियों के रूप से, मिटे दुखों का त्रास।।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर, बिहार

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