
कार्तिक की चतुर्थी आयी,
प्रेम का वो उत्सव लायी,
नारी के त्याग, समर्पण की,
आज अनुपम कथा दोहरायी।।
सरगी से चाँद दिखने तक,
भूखी-प्यासी रह जाती है,
प्रियतम की लंबी उम्र की,
वो दिल से कामना करती है।।
सोलह श्रृंगार, मेहंदी, चूड़ी,
बिंदी की प्यारी लाली है।
सजकर जब वो आती है,
घर में खुशहाली छा जाती है।।
ये श्रृंगार नहीं केवल,
आत्म-सम्मान की बात है।
नारी के सम्मान में ही तो,
समाज की प्रगति का राज है।।
करवा माता की कथा कहे,
वहाँ प्रेम कभी हारता नहीं।
जहाँ निष्ठा और विश्वास है,
वहाँ यम भी ठहरता नहीं।।
आज पति भी व्रत रखते,
प्रेम अब एकतरफा हैं नहीं।
समता सम्मान और बराबरी,
यही तो सच्चा प्रेम सही।।
छलनी से चाँद को देखे,
फिर देखे पिया का मुख।
उस एक पल में सिमट आता,
हमारे जीवन का सारा सुख।।
ये व्रत कोई कमजोरी नहीं,
नारी की शक्ति का मान है।
मुन्ना राम कहे सच्चे दिल से,
नारी तो आज भी महान है।।
चाँद सा चमके जीवन,
खुशहाली घर में आये।
करवा चौथ की शुभकामना,
हर जोड़ी पर यूं प्रेम बरसाये।।
मुन्ना राम मेघवाल’भाटी’,
कोलिया, डीडवाना, राजस्थान।













