
करवा चौथ
कार्तिक मास की चतुर्थी,
प्रेम सुधा बरसाए।
करवा चौथ का पावन पर्व,
मन में आस जगाए।।
धवल चाँद की छाँव तले,
प्रेम का दीप मुस्काए।
जन्म-जन्म का साथ मिले,
मन में यह आस लगाए।।
कर सोलह श्रृंगार प्रिया,
छलनी में प्रिय निहारे।
नयनों में विश्वास लिए,
मन में सदा उन्हें धारे।।
दिनभर निर्जल व्रत रख,
पति हेतु कामना मागे।
सुख-दुख में सदा संग रहें,
बस यही हृदय में जागे।।
चंदा की शीतल चाँदनी,
प्रेम सुधा बरसाए।
पति-पत्नी प्रेम का बंधन,
शुभ पर्व यह बढ़ाए।।
सभी सुहागिनें मां करवा ,
से करती एक ही प्रार्थना,
प्रेममय घर खुशियों के संग,
खुशबू सा महके अंगना।।
भगवान दास शर्मा “प्रशांत”
इटावा उत्तर प्रदेश













