
धन्वंतरि का वरदान मिले, हर घर में खुशहाली हो,
स्वस्थ रहे तन, स्वस्थ रहे मन, जीवन में हरियाली हो।
आयुर्वेद की अमृत धारा, जन-जन तक पहुँचाएँ हम,
नियमित दिनचर्या अपनाकर, रोगों को दूर भगाएँ हम।
औषधियों का ज्ञान दिया, जीवन का आधार दिया,
जड़ी-बूटियों के माध्यम से, स्वस्थ रहने का सार दिया।
सेवा, संयम, शुद्ध आहार, स्वास्थ्य के सच्चे साथी,
योग, प्राणायाम से मिटती, मन की व्यथा और थकान भी।
ताजा भोजन, स्वच्छ जल, दिनचर्या नियमित हो,
मन में प्रेम, विचारों में शुभता, जीवन आनंदित हो।
तन की रक्षा जितनी जरूरी, मन का स्वस्थ रहना है,
चिंता, क्रोध, ईर्ष्या छोड़कर, प्रेम सुधा को पीना है।
धन-दौलत से बढ़कर जग में, स्वास्थ्य अनमोल खजाना,
इसकी रक्षा करना सीखें, यही जीवन का नजराना।
धन्वंतरि की कृपा बरसती, सबके जीवन में हर बार,
निरोगी काया, निर्मल मन हो, खुशियों से भरा संसार।
यही संदेश जन-जन तक पहुँचे, यही हमारी अभिलाषा,
स्वस्थ रहे हर एक इंसान, यही धन्वंतरि से आशा।
डॉ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार













