
विधा : पद्य
आ गया पावन कार्तिक महीना ,
आस्तिक आस्थावान भान का ।
गंगा स्नान दीवाली भैयादूज ,
ऑंवला पूजन छठ महान का ।।
आज छोटी दीवाली लक्ष्मी अंश ,
धनतेरस यही है धन ते रस ।
जबतक हो लक्ष्मी कृपा नहीं ,
धन अर्जन कहाॅं अपने वश ।।
धन लगाओ धन लेकर आओ ,
धन लेकर धन सगुन मनाओ ।
कर लो माता लक्ष्मी की पूजा ,
रुपया पैसा सर्वधन पाओ ।।
पूजा होत ये तो पावनता का ,
पूजा पूर्व मन पावन बनाओ ।
मन के भीतर जो मैल जमा है ,
मैल निकाल सफल हो जाओ ।।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।













