विश्व हिन्दी सेवा सम्मान से अलंकृत हुईं डॉ श्रीमती विनिता कँवर राठौड़; पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने किया उनके ग़ज़ल संग्रह ‘परछाई के साये में’ का लोकार्पण

विश्व हिन्दी परिषद्, नई दिल्ली द्वारा विज्ञान भवन में आयोजित द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘भारत रत्न अटल: हिन्दी, राष्ट्रवाद और सुशासन’ देश-विदेश के विद्वानों, साहित्यकारों एवं चिंतकों की गरिमामयी सहभागिता के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर दोहा, क़तर से पधारीं प्रख्यात साहित्यकार, ओजस्वी वक्ता एवं शिक्षाविद् डॉ. श्रीमती विनीता कँवर राठौड़, अध्यक्ष सर्वहितकारी अंतरराष्ट्रीय मंच, को हिंदी भाषा, साहित्य, भारतीय संस्कृति एवं शैक्षणिक नवाचार के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान हेतु भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू के कर-कमलों से प्रतिष्ठित ‘विश्व हिन्दी सेवा सम्मान’ से अलंकृत किया गया। इसी अवसर पर उनके चर्चित ग़ज़ल संग्रह ‘परछाई के साये में’ का भव्य लोकार्पण भी संपन्न हुआ।
डॉ. राठौड़ की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक साधना का विस्तार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक है। इसके पूर्व उनको विश्व हिंदी सचिवालय, मॉरीशस द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय विश्व हिंदी दिवस समारोह में उन्हें स्वरचित कविता पाठ, आलेख प्रस्तुति एवं मंच संचालन का गौरव प्राप्त हुआ। वे ‘अमृत कुंभ’ एवं ‘राष्ट्रीय गौरव सम्मान’ सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से भी विभूषित हो चुकी हैं।
विशेष उल्लेखनीय है कि क़तर में प्रवासी भारतीय के रूप में रहते हुए भी वे हिंदी, भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु निरंतर समर्पित हैं। एक प्रमुख भारतीय विद्यालय में संस्कृत भाषा के अध्यापन का शुभारंभ उनके इसी सांस्कृतिक संकल्प की उल्लेखनीय उपलब्धि है। सम्मेलन में अपनी राष्ट्रनिष्ठ भावनाओं को स्वर देते हुए उन्होंने कहा
“वतन की पाक मिट्टी से मुहब्बत हम भी रखते हैं,
फ़िदा सरहद पे जाँ करने की हिम्मत हम भी रखते हैं।”
सम्मेलन की अध्यक्षता विश्व हिन्दी परिषद् के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्मभूषण श्री यार्लगड्डा लक्ष्मी प्रसाद ने की। प्रमुख अतिथियों में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा, पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अश्विनी चौबे, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं परिषद् के मुख्य संरक्षक श्री इंद्रेश कुमार, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विपिन कुमार, उपाध्यक्ष डॉ. डी.एस. मिश्रा, राष्ट्रीय समन्वयक श्री नंद किशोर साहा, प्रो. सच्चिदानंद मिश्र, श्री अनिल ठाकुर, श्री दीपक ठाकुर, फिजी के राजदूत श्री जगन्नाथ सिमी सहित देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व एवं अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, लंदन तथा जापान से आए प्रतिनिधि सम्मिलित रहे।
कल्पकथा साहित्य संस्था संस्थापक दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा ने उन्हें बधाई देते हुए कहा यह उपलब्धि डॉ. विनीता कँवर राठौड़ की साहित्यिक प्रतिभा, राष्ट्रनिष्ठ चिंतन और मातृभाषा के प्रति अविचल समर्पण का सम्मान है। उनकी साधना प्रवासी भारतीय साहित्यकारों के लिए प्रेरणास्रोत होने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर हिंदी की प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करने वाला गौरवपूर्ण अध्याय है।













