
साथ में थे हम सभी खुशहाल ये परिवार था,
महफिल सजी रह गई रौनक बिना संसार था।
जिंदगी कब तक हमारी साजगार रही बसी,
डूबते उभर कर दिल दरिया बना आधार था।
एक दूजे में बसी रहती हमारी जान भी,
टूट जिगर गया बदनसीबी हुआ लाचार था।
क्या कहूं राज दिल का आज सुधि खोने सी लगी,
आप थे जब साथ में दिन रात बस तब प्यार था।
सुमन की तमन्ना खुदा पूरी करेंगे रहम से,
कसम से पहले हर घड़ी हर दरे गुलजार था।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा
मुजफ्फरपुर,बिहार













