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म्हारौ सौभाग्य

(भक्ति रस री कविता — राजस्थानी)

म्हारौ सौभाग्य, पायो थारौ दरश,
जीवन री नैया लागी थारा परस।
जी भटकतो थो रे मरुधर में ज्यूँ पंछी,
थारे नाम सूं मिल्यो मन नै सांचो अर अमल रस।

थारा चरणां में बिठायो मोहे,
म्हारी भूलां नै क्षमा करायो मोहे।
ना मांगूं धन, ना मांगूं राज,
म्हाने तो सिरो प्यारो — थारो साज।

श्याम साँवरा, थारी मुरली री तान,
सुनते ही भर जावे मन में प्राण।
म्हारौ सौभाग्य — थारो नाम जपूं रे,
हर घड़ी, हर पल, थारी याद मं डूबूं रे।

बांके बिहारी, सांवला सरकार,
थारी भक्ति में ही मिल जावे मोक्ष द्वार।
जगत माया तो आई-जाई,
थारी कृपा ही साची कमाई।

म्हारौ सौभाग्य — थारो प्रेम पायो,
थारी भक्ति में मन रमायो।
कदाचित पुनर्जन्म होवै, तो फेर थारो दास बन जावां,
थारी ओढ़णी ओढ़, थारा गुण गावां।

डॉ बीएल सैनी
श्रीमाधोपुर सीकर राजस्थान

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