
मिलन की ख्वाहिश
जब
रंग लाती है,
तब
छुपी
तन्हाई भी साथी बन
उम्रभर
सताती है।
पलकों के घूंघट में,
आंखों की नमी
चंदन सी
महक
जाती है।
संध्या दीक्षित












