
सावन के आते ही प्रकृति हुई सुहानी है।
इन बारिश की बूंदों की एक कहानी है।।
गिरती हैं टिप-टिप जब धरती पर
संगीत की सुर लहरियां सी सुनाती हैं।
भिगाती हैं आंचल विरहन का…
मिलन की आस उसे तरसाती है।
ये बारिश की बूंदे गिरती जब
पत्तों पर शबनम सी चमकती हैं।
बुझाती हैं प्यास तप्त धरा की…
मिट्टी की सौंदी खुशबू सी महकती है।
चंचल सी ये बारिश की बूंदे
बच्चों का मन मोह लेती हैं।
अटखेलियां करती संग उनके
कागज की कश्ती बहा ले जाती हैं।
भर देती हैं नदी, पोखर, तालाब,
सब हरा-भरा कर देती हैं।
देकर लहलहाती फसलें….
हर किसान को हर्षित करती हैं।
बन जाती हैं आफत कभी जब
बाढ़ का रूप धारण करती हैं ।
बहा ले जाती हैं सब कुछ…
तबाही के केवल निशान छोड़ जाती हैं।
लगातार बरसती जब करती मनमानी हैं।
अजब इन बारिश की बूंदों की एक कहानी है।।
स्वरचित:- उर्मिला ढौंडियाल’उर्मि’
देहरादून (उत्तराखंड)












