गुरु की कृपा अगर हो जाए,
लघुता शीर्ष शिखर छाजाए !
ज्ञान वर्तिका “जिज्ञासु” की,
अंधकार से मुक्ति दिलाए !!
गुरु की कृपा अगर हो जाए,
माया मोह निकट नहीं आए !
भ्रमजालों का भेदन करके,
बुद्धि विवेक का बोध कराए!!
गुरु की कृपा अगर होजाए!
ऊंच-नीच का भेद मिटा कर,
सहृदयता,सद्भाव जगाए !
अंतस्तल को निर्मल करके,
भवसागर से पार कराए !!
गुरु की कृपा अगर होजाए!
रूप राशि से ध्यान हटाकर,
जीवन को मधुमास बनाए !
अंतर्द्वंद से मुक्त भारती,
अखिल विश्व में, फिर छाजाए !!
गुरु ज्ञानानंद नाथ की प्रज्ञा,
‘जिज्ञासु’ जन प्रखर बनाए!
लघुता शीर्ष शिखर छाजाए,
गुरु की कृपा अगर हो जाए !!
कमलेश विष्णु सिंह ‘जिज्ञासु’











