
मेरे सभी गुरुजनों और मित्रजनों को गुरु
पूर्णिमा के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
गुरु कृपा इस भवबंधन से पार लगाने वाली वैतरणी है। गुरु के चरणों में स्वर्ग है। अतः सदैव गुरु कृपा के आकांक्षी बने रहना चाहिए।
भारतीय जनमानस में सदैव ही राम और कृष्ण विराजते हैं। भारतीय जनता की भावधरा पर गुरूजन और भगवान हमेशा ही आदर के पात्र समझे जाते रहे हैं। "गुरू बिन ज्ञान न होवे"का उद्घोष करने वाली भारतीय संस्कृति में भगवान कृष्ण का स्थान अर्जुन के परम सखा और रणनीतिक गुरू के रूप में वर्णित है।
* श्रीकृष्ण भगवान ने भारत को गीता के रूप में वह अतुलनीय ज्ञान दिया है जिस की महिमा सारे विश्व में है।
कृष्ण के जीवन को जानना और समझना हमारी मानव बुद्धि से परे है। वे एक साधारण बालक के रूप में जन्म लेते हैं ।उनके जन्म के साथ उनको जन्म देने वाले माता पिता से ही उनका बिछोह हो जाता है जिससे यह पता चलता है कि कोई भी संबंध चिरस्थायी नहीं होता है। उसके बाद उनका पालन-पोषण नन्द बाबा और यशोदा माता के द्वारा किया जाता है । ब्रज भूमि में उनकी बाल लीलाएं और क्रीडाएं नन्द-यशोदा के जीवन की अनमोल धरोहर बन जाती हैं।
ब्रज भूमि में अपने हमउम्र संगी साथियों के साथ खेलना, गाय चराने जाना और माखन चुराना और फिर मटकी तोड़ देना यह सब बाल सुलभ लीलाएं एक महान आत्मा से सामान्य मानव में रूपांतरित होने की कलाएं हैं जो यह बताती हैं कि सामान्य जीवन भी बहुत सुंदर और सुखमय हो सकता है। वास्तव में कान्हा जी का पूरा जीवन एक प्रेरक प्रेरणा है जिसे कुछ शब्द बांध नहीं सकते हैं। नमन है भारतीय संस्कृति के सबसे बड़े गुरु को
संध्या दीक्षित












