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मेरी पहली किताब

मेरे लेखन का सफ़र भी क्या सफ़र हुआ है
भावनाओं का मेरी जैसे एक सागर हुआ है ll

जाने अनजाने मेरा लिखना शुरू हुआ था
अब चलता कारवाँ सा साबित हुआ है ll

मेरी पहली किताब मेरे जीवन की कहानी है बनी
जो कभी सम्भव नहीं होती, वो यादगार निशानी है बनी ll

सामन्यतः इंसान की जिंदगी के जाने कितने पहलूओं को दिखाती है
ये किताब जीवन के हर मोड़ को दर्शाती है ll

कितनी कविताओं में अनुभवों का साया लिखा
बाकी रहे अरमानों को पूरा करने का सरमाया लिखा ll

खूबसूरत अहसासों को व्यक्त करने की मन से अनुमति माँगी
हो या ना हो कोई याद, जिंदगी की हर शाम सुहानी माँगी ll

जिंदगी की घनी धूप में छांव रूपी माँ बनकर कभी बेटी को अभिव्यक्ति किया
तो कभी माँ के आँचल को नीले अम्बर सा लहराया ll

बहनों के निस्वार्थ स्नेह को, पिता के अथाह प्रेम को शब्दों का उपहार दिया
सोच सोच कर लिखा,तो बस ऐसे ही मैंने अपनी पहली किताब को लिखा ll
मीना

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