
झाँसी जिले की मऊरानीपुर तहसील के अन्तर्गत आने वाले ग्राम चकारा, थाना- घाट लहचूरा में उच्च प्राथमिक विद्यालय चकारा के पास रमणीय प्राकृतिक स्थल है, जिस पर चतुर्भुज विष्णु भगवान का प्रसिद्ध मन्दिर है, जो बहुत ही पुराना और दिव्य मन्दिर है। मन्दिर के लिए पहाड़िया पर सीढ़ी बनी हुई हैं जो कि काफी फैली हुई हैं, जिसके कारण यात्री थकान महसूस नहीं कर सकते। पचास-साठ सीढ़ियों की आसान चढ़ाई और पाइये विष्णु भगवान के दिव्य रूप के मनोहर दर्शन। साथ में वहाँ बगल में पूरब मुखी हनुमान जी और अन्दर ठीक सामने विष्णु भगवान के बगल में दाहिनी ओर पंचमुखी महादेव और चौंसठ योगिनी के दर्शन। मन्दिर में चारों ओर धर्मशालायें बनी हुई हैं ताकि यात्रियों को सर्दी, बरसा और गर्मी में परेशान न होना पड़े। यहाँ ठहरने की समुचित व्यवस्था है।
पहाड़ी के नीचे महादेवी मन्दिर, कामदगिरि मन्दिर (कामतानाथ), सन्त रैदास मन्दिर, राधा-कृष्ण मन्दिर और तुलसी तथा अनार वाटिका है, जो बहुत ही मनोहर प्राकृतिक सौन्दर्य को अपने में समेटे हुए हैं।
यहाँ के पुराने लोग और पुजारी बताते हैं कि श्रीहरि विष्णु यहाँ कब पधारे? ये कोई नहीं जानता। यह स्वयं पहाड़ी से निकलकर ऊपर आते गये, वैसे-वैसे इनके चारों ओर ढ़की बिशाल चौड़ी और लम्बी शिलाओं की दीवारें इनके साथ ऊपर उठती गयी जो आज भी इनके चारों ओर सुरक्षा कवच बनाये हुए हैं। हालाँकि बहुत पहले इनके चारों ओर भव्य मन्दिर का निर्माण कर दिया गया है। यहाँ खैर, सीताफल, कदम्ब के वृक्ष बहुतायत से पाये जाते हैं जो कि बहुत ही शीतलता बिखेरते हैं। यहाँ प्रतिवर्ष पुरुष और महिलाएँ आकर भोजन बनाकर श्रीहरि को समर्पित कर फिर प्रसाद रुप भोजन वहाँ ग्रहण करते हैं। इससे पहले सभी आरती कर धूप-दीप दिखाकर भगवान विष्णु, शिवजी और हनुमान जी को प्रसाद लगाते और वहाँ भजन गाकर आनन्द मनाते हैं। यहाँ प्रति वर्ष भव्य मेला भी लगता है, जहाँ आस-पास के सभी गाँव-नगर के लोग दूर-दूर से आते हैं।
यहाँ के बारे में कहा जाता है कि यहाँ मनायी हुई मनौती सदा फलवती हुई है। यहाँ दूर-दूर से बम्बई, जयपुर, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृन्दावन और ग्वालियर, आगरा, हरियाणा और गुडगाँव के लोगों की मनोकामनाएँ पूरी हुईं। सभी भक्तजन श्रद्धा-प्रेमपूर्वक और भक्ति के साथ यहाँ आकर मनोवांछित वरदान पाते हैं और सुखी होकर लौटते हैं। यहाँ त्रिलोकीनाथ हैं, इनसे बड़ा भला कौन है जगत में? यह विश्व विधाता और कर्म नियन्ता हैं और उसका फल भी देने वाले हैं। यहाँ बैठकर ग्यारह हजार या इक्कीस हजार शिव मन्त्र-जप करने और हवन करने से श्री विष्णु की अहर्निश कृपा मिलती है तथा सभी काम सहज ही फलीभूत होकर रोगों से मुक्ति मिलती है। बड़े से बड़े प्रारब्ध यहाँ श्री हरि और शिव कृपा से कटते देखे गये हैं। खोयी हुई चीज यहाँ आकर मनौती मनाने पर सहज ही मिल जाती है। एक बार जरूर यहाँ आकर अपना जीवन सफल और निर्मल बनायें। मऊरानीपुर से सीधे लहचूरा मार्ग पर या बम्हौरी से चकारा विष्णु धाम पहुँचा जा सकता है। मऊरानीपुर से यहाँ तक पक्की सड़क गयी हुई है।
आलेख-
पं० जुगल किशोर त्रिपाठी (साहित्यकार)
बम्हौरी, मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)













