धरती की गोदी में जन्मा
हल जो थामे श्रम को रमजा
सूरज संग जले खेतों में
पसीना मोती बन बहता जाए
आसमान से जब बदरा छाए
आशा की किरणें जग में आए
रिमझिम फुहारों की मुस्कान
भर दे जीवन में नई जान
धरती का कण कण पुलकित हो
अन्नदाताओं का मन चहके सो
हरियाली ओढ़े धरा की छाया
धानों की बाली में साज समाया
सुख की सरिता बहती जाए
गांव की गलियों में खुशबू छाए
सावन संग आए नव प्रेरणा
भूमिपुत्र पाए कर्म-साधना
डॉ बीएल सैनी
श्रीमाधोपुर सीकर राजस्थान












