
जमाना कहता है,
” आईना सच बोलता है”।
पता नहीं क्यों
मेरा दिल कहता है,
“गर आईना सच देख पाता,
शक्ल देखते इंसानों का
दिल टटोल कर
हाल खुद पर झलका पाता,
तो इंसानों के घरों की
दीवारों पर आईना, ना सज पाता।”
सुलेखा चटर्जी,
भोपाल–

जमाना कहता है,
” आईना सच बोलता है”।
पता नहीं क्यों
मेरा दिल कहता है,
“गर आईना सच देख पाता,
शक्ल देखते इंसानों का
दिल टटोल कर
हाल खुद पर झलका पाता,
तो इंसानों के घरों की
दीवारों पर आईना, ना सज पाता।”
सुलेखा चटर्जी,
भोपाल–
साहित्यकार, लेखक, कवि, राजनीतिज्ञ, शिक्षाविद्, राष्ट्रीय प्रवक्ता और समाजशास्त्री डॉ. ओम सिंह शेखावत “अनन्य” द्वारा प्रस्तुत कहानी।
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