
स्वच्छ सुन्दर गाँव बनाकर, भारत को स्वर्ग बनाना है। बनाके अपने गाँव को ओ. डी. एफ., हर एक दिन
उत्सव मनाना है।। खुले में शौच को बंद करके, इस रावण को मार भगाना है। गाँव गली को स्वच्छ बनाके, कुंभकर्ण, मेघनाथ को जलाना है।। दशहरा का त्योहार जिसमे, दस अवगुणों को नष्ट कराना है। शौच जाने के बाद, धोके साबुन से हाथ। खाना खाने से पहले भी, हाथ सबको धुलाना हैं।। इन गुणों को अपनाकर, जीवन स्वस्थ्य बनाना है।। इसी लिए तो, सारे जीवन में
स्वच्छता को अपनाना है।। कविता रचनाकार- नंदकिशोर गौतम (माध्यमिक शिक्षक) शास. उच्च. माध्य. विद्यालय बकोडी (कुरई), जिला- सिवनी (म.प्र.) मो. न.













