
एक चेहरे पर कई चेहरा लगाए घूमते हैं लोग,
सच को झूठा, झूठ को सच्चा बताते हैं लोग।
यहाँ मुश्किल है इंसानों को पहचान पाना,
चेहरों पर नकाब लगाए फिरते हैं लोग।
यहाँ थोक में गालियाँ मिलती हैं उनको,
जो सच्चाई के रास्ते पर चलते हैं लोग।
झूठों का ही बोलबाला है चारों ओर,
सच्चों का मुँह काला यहाँ करते हैं लोग।
यहाँ कसमों की कोई मोल नहीं,
रिवाज़ रोज़ बदलते हैं लोग।
रिश्ते रोज़ टूटते हैं यहाँ,
दिखावे की ज़िंदगी जीते हैं लोग।
सगा किसी का न बंधन में कोई,
मतलब से रिश्ते बनाते हैं लोग।
आर एस लॉस्टम












