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मेरी माँ

​अश्रु की बूंद नहीं, जीवन का सार है,
गोद जिसकी स्वर्ग है, पहला संसार है।।

​निश्छल प्रेम की वह मूरत प्यारी,
हर दुःख हर ले, ममता की फुलवारी।

​पथ पर ठोकर लगे, तो हाथ थामती है,
बिन बोले ही मन की हर बात जानती है।।

​तेरी लोरी में सुकून, तेरी झिड़की में प्यार है,
तू ही शक्ति मेरी, तू ही मेरा आधार है।।

​कष्ट सहकर भी मुस्कान सजाती है,
जब भी दुख आए मां तू ढाढस बंधाती है।।

मां तेरे निश्छल प्रेम को देखकर, ह्रदय में मुस्कान समाती है।।

हर परिस्थिति में जीने की कला सिखाती है,
तभी तो मां तु सबके मन को भाती है।

तेरी बेटी रीना कहती,
​हे जननी! तेरे चरणों में नमन मेरा,
तू अमिट है, अद्वितीय है स्नेह तेरा।

                  मेरी कलम से 
             रीना पटले (शिक्षिका)
             शास. हाई स्कूल ऐरमा 
              सिवनी (मध्य प्रदेश)

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