
हमें सदा आगे बढ़ना,
किसी से नहीं है लड़ना।
सूरज भी समय पर उठता ,
नदियाँ भी किनारों से बहती।
समय से उठना समय से पढ़ना,
और बड़ों का आदर करना।
प्रतिदिन नैतिकता का पाठ पढ़ना,
और अनुशासन का पालन करना।
होता इससे हासिल ज्ञान,
बनता इससे मनुष्य महान।
युद्ध हो या खेल मैदान,
पीछे तुम कभी न हटना।
बच्चों प्रतिदिन पाठ यह पढ़ना,
और अनुशासन का पालन करना।
मानवता को देती सुख ,
कुदरत जब संयम में रहती।
तुम भी इससे सबक यह सीखना,
अनुशासन का पालन करना
कविता रचनाकार – नंदकिशोर गौतम
( माध्यमिक शिक्षक)
शास. उच्च. माध्य. विद्या. बकोडी











