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अधूरा करवा चौथ

​छूटा जब से साथ तुम्हारा,
​आया फिर ये कारवा चौथ।
मगर तुम मेरे साथ नहीं।
खाली है ये चाँद की थाली,
अब तो कोई बात नहीं।

जब से छूटा साथ तुम्हारा,
जीवन हुआ अंधेरा सारा,
कैसी है ये अग्निपरीक्षा,
अब तो कटती रात नहीं।

​हाथों की ये मेहंदी फीकी,
रंगत इसकी कौन बढ़ाए?
जिसके लिए रखा था व्रत,
वो चेहरा अब कहां मैं पाएं?

तुम्हारे बिन ये श्रृंगार अधूरा,
कैसा है यह दुखद सवेरा?
जिस दिल में था तेरा बसेरा,
अब क्यूं दिल में दुखों का पहरा।

​छलनी से देखूँ चाँद को,
या देखूँ अपनी सूनी माँग को?
आँखों में है नीर भरा,
क्या कोसूं अपने भाग्य को?

काश तुम होते पास मेरे,
फिर से वही श्रृंगार होता,
पर अब तो बस एक याद है तेरी,
बाकी, दर्द का आलम रोता।

​व्रत तो पूरा कर लिया मैंने,
पर आरती में आवाज नहीं।
तुम्हारे बिना ये पर्व अधूरा,
अब तकदीर पर कोई नाज़ नहीं।

तुम्हारी रीना कहती तुमसे,
अगले जन्म में फिर से मिलना,
पूरी करना मेरी आस।
जब तक न हो तुम मेरे पास,
तब तक हर पल है उदास।

             दिल की कलम से.......
          रीना पटले (शिक्षिका) 
       शासकीय हाई स्कूल ऐरमा 
           सिवनी (मध्य प्रदेश)

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