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आज चंदा को छोड़ दो

आज चंदा को छोड़ दो, संदेश मेरा भी,
थोड़ा देर से निकले, भेज दो तार मेरा भी।
थोड़ा मैं भी तो समझ लूं अहमियत अपनी,
आज उनको भी लगे — है ज़रूरत मेरी भी।

रोज़ सताती हैं मुझको, उठाता हूं नखरे भी,
आज मैं भी तो उन्हें थोड़ा-सा तंग कर लूं।
थोड़ा चंदा को भेज दो समाचार मेरा भी,
आज देर से निकले, रख ले थोड़ा-सा मान मेरा भी।

अब तो पत्नियां बहुत सताने लगी हैं,
पर अजीब है — फिर भी भाने लगी हैं।
पूरे साल लड़ती हैं, झगड़ती हैं,
फिर भी तीज़ और करवा चौथ पर
पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।

सोचता हूं — कितना सुंदर होता ये रिश्ता,
अगर पत्नियां प्रेमिकाएं भी होतीं ज़रा-ज़रा सा। ❤️
रूपेश सिंह लॉस्टम

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