
ओ मेरे प्यारे से चांद
जल्दि से आ जाओ ना
बहुत हो गई लूका छुपी ,
अब तो समने आ जाओ ना
बादल और बर्षा के ईस मिलन में
हमरी प्यास को भुल जाओ ना
बहूत हो गयी लुका छुपी
अब तो सामने आ जाओ ना
पुजा हो गयी कथा भि हो चुका
पकवान बन गया भोग लग चुका
अब तो तरस जरा खाओं न
बहुत हो गई लूका छिपी
अब तो सामने आ जाओ ना
सारा ससुराल चुटकी ले रहा
देवर नंद को मजा आ रहा
बारिश भी अब थम थम रहा है
आसमान भी साफ हो रहा
अब तो व्याकुलता मिटाओ ना
बहुत हो गई लुका छिपी
अब तो सामने आ जाओ ना
श्रीमती अंजना दिलीप दास
बसना महासमुंद











