
चंदा जल्दी गगन पर आना राह निहारे सुहागन ,
आज का दिन पावन है।।
टीका सजाना सर पर ,चढ़ा था जो तुम्हरे ब्याह में
चूड़ी पहननाऔरमेहंदी लगाना प्रिय की चाहमें
नव दुल्हन सी तुम सज जाना, अपने पिया की खातिर ।
आज का दिन पावन है।।
ओ प्रियतम जल्दी आना राह निहारे, हम सब बैठकर,
करवा सजाए हमने व्रत रखा अखंड सौभाग्य पर,
लाल चुनरिया डाल के सिर पर
माथे पर बिंदिया लगाई
आज का दिन पावन है।।
ओ प्यारे प्रियतम आकर जल्दी से दरस दिखा देना,
व्रत रख के बैठे हम सब हाथों से जल भी पिला देना,
विनती करती हर सब सुहागन आकर
खुशियां देना।
आज का दिन पावन है।।
आरती उतारू पूजा करती समर्पित भाव से,
छन्नी सजाकर तेरा चेहरा निहारुं अर्पित भाव से,
जियो हजारों बरसोंतक तक तुम यही दुआयेमांगे ,
आज का दिन पावनहै।।
पुष्पा पाठक छतरपुर मध्य प्रदेश











