
तेरे प्रीत की दस्तक है मेहंदी।
सुहागिनों की सौगात है मेहंदी।
गहरी प्रेम की धारा है मेहंदी।
दो दिलों की लाल गहरा रंग है मेहंदी।
कसमें वादें की मांग है मेहंदी।
प्रीत में भिगोए ऐसी मनमीत है मेहंदी।
हाथों पर रचाई हुई तेज है मेहंदी।
रूठे हुए को हंसाती है मेहंदी।
नई पहचान, उम्मीदों की जान है मेहंदी।
इश्क़, मोहब्बत की लकीर है मेहंदी।
दो दिल एक जान की रंग है मेहंदी।
धड़कनो को मिलाने की जोश है मेहंदी।
चढ़ती नहीं सिर्फ चढ़ाने से मेहंदी।
दिल से लगाओ तो प्यार से रंग दे मेहंदी।
पावन, शुभ अवसर को खुशी से रंगती मेहंदी।
शादी, हरतालिका तीज, करवा चौथ, दशहरा, दिवाली की चमक हैं मेहंदी।
कवयित्री दुर्वा दुर्गेश वारीक ‘गोदावरी’ (गोवा)












