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ममता मयी माँ

ममता मयी माँ
आज तक नहीं भूल पाती हूं,
बोलती कलम
वह चुंबन, वह आलिंगन, वह मुस्कान
पिया संग विदा होते समयमां ने गले लगाया था।
पता नहीं, क्या समझाया था!!
इतने बरसों बाद आज, फिर माँ याद आई,
वह मुस्कान याद आई, आज ही तो गई थी तुम

जब मैं पुत्र और उसकी वधु को
विदा देती हूं, आंखें छलक जाती हैं।
मुझे गले लगा कर मेरी पुत्रवधू
आंसू पोछ देती है।
मुझे बरबस मेरी मां
याद आती है।

सुलेखा चटर्जी

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